इतिहास


अन्नछत्र का इतिहास

अक्कलकोट महाराष्ट्र के सोलापूर जिले में स्थित है I यह एक तहसील है और महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमाओ पर स्थित है I आप अगर अक्कलकोट जाना चाहे तो बस या ट्रेन से सोलापूर, नलदुर्ग, गुलबर्गा, गाणगापूर, अफझलपूर, अक्कलकोट इस रास्ते से पहुच सकते है I अक्कलकोट एक ऐतिहासिक महत्व प्राप्त शहर है और यह एक रियासत हुआ करती थी जिसके महाराजा श्रीमंत भोसले हुआ करते थे I इसे महान योद्धा जैसे कि श्रीमंत फतेहसिंगराजे भोसले, शहाजीराजे-I, मालोजीराजे, फतेहसिंग III और श्रीमंत विजयसिंहराजे भोसले जैसे योद्धाओन्की परंपरा है I अक्कलकोट महाराष्ट्र और पुरे हिंदुस्तान में लोकप्रिय होने का कारण बने, श्री दत्तात्रेय भगवान का अवतार श्री स्वामी समर्थ महाराज! श्री स्वामी समर्थ का यह अवतार श्रीमंत मालोजीराजे भोसलेजी के राज्यकाल के दौरान संपन्न हुआ I २२ साल के अक्कलकोट निवास के दौरान श्री स्वामी समर्थ ने कई चमत्कार कर दिखाये जिनकी वजह से उनकी गरिमा पुरे महाराष्ट्र में गायी जाने लगी I



अन्नछत्र की कल्पना और प्रेरणा

एक बार भगवान श्री दत्त के स्थान श्री औदुंबर से कुछ साधू श्री स्वामी समर्थ महाराज के दर्शनोंके लिए अक्कलकोट स्थित मंदिर में आये I दर्शन पश्चात उन्होने आदरणीय मोहन पुजारी जी और श्री जन्मेजयराजे भोसले जी के पास भोजन कि व्यवस्था के बारे में पुछताछ की I तब आदरणीय श्री मोहन पुजारीजी ने उनकी भोजन व्यवस्था की I लेकीन अक्कलकोट एक तीर्थ क्षेत्र होने के बावजूद यहां बाहर से आनेवाले भक्तोंकी प्रसाद व्यवस्था नही यह सोचकर श्री जन्मेजयराजे भोसले महाराज दुःखी हुए I कुछ दिनोंबाद मंदिर में श्री दत्त और श्री जगदंबा माता के चित्र रंगने का काम चल रहा था, तब आदरणीय मोहन पुजारी जी ने श्री जन्मेजयराजे भोसले के आगे साक्षात श्री दत्त के अवतार श्री स्वामी समर्थ महाराज की पावन नगरी में अन्नछत्र शुरू करने की कल्पना प्रस्तुत की I श्री जन्मेजयराजे भोसले जी ने तुरंत यह कल्पना स्वीकार कर वहां उपस्थित श्रद्धालू जन से बातचीत भी की I



अन्नछत्र की स्थापना

थोडेही दिनों में श्री गुरुपौर्णिमा के अवसर पर उत्सव मनाये जाने वाला था और इसी शुभ मुहुरत पर अन्नछत्र की नींव रखने कि श्रीमंत भोसले महाराजने मन ही मन ठान ली I भोसले राजपरिवार पार श्री स्वामी समर्थ महाराज कि असीम कृपादृष्टी तो थी ही, और इसीलिये अन्नदान का यह पुण्यकर्म श्री स्वामी समर्थ महाराजने श्री जन्मेजयराजे भोसले महाराज के हाथो करवाने का निश्चय किया I उचित योजना बनाकर श्री जन्मेजयराजे भोसले महाराज ने कुछ उत्साहित युवओन्को साथ लेकर श्री गुरुपौर्णिमा के शुभ दिवस पर श्री स्वामी समर्थ चरित्र सारामृत का सार्वजनिक पाठ कर, मंदिर के परिसर के आसपास स्थित कुछ घरोमें भिक्षा मांगी और इस भिक्षा से मिले ३ किलो चावल पकाकर उन्होने श्री स्वामी समर्थ महाराज को भोग चढाया I फिर मंदिर में उपस्थित पांच पचास भक्तजनोंको वह 'महाप्रसाद' खिलाया I इस तरह से प्रचलित अन्नछत्र कि नींव रोयी गयी I २९ जुलाई, १९८८ को श्री गुरुपौर्णिमा के शुभ अवसरपर इस अन्नछत्र की सेवा शुरू हुई जिसका नामकरण "श्री स्वामी समर्थ अन्नछत्र मंडल, अक्कलकोट" किया गया I सरकारी दफ्तर में भी इसे मान्यता प्राप्त करने हेतू सोसायटी एक्ट के तहत इसका पंजीकरण किया गया (पंजीकरण क्र. २०९४, सोलापूर) I धीरे धीरे इसका विस्तार होने लगा और अन्य शहरोंसे भक्तोंकी तरफ से दान की रकम आने लगी और ट्रस्ट की स्थापना करने की आवश्यकता महसूस होने लगी I इस कारण, श्री जन्मेजयराजे भोसले जी ने उनके कुछ निकटवर्ती लोग और स्वामी जी के भक्तोंको सहभागी कर पब्लिक ट्रस्ट की स्थापना की I (पब्लिक ट्रस्ट क्र. एफ/ २२७९/ सोलापूर दि. २९/११/१९८९) श्री जन्मेजयराजे भोसले महाराज पहले संस्थापकीय अध्यक्ष चुने गये और श्री स्वामी समर्थ अन्नछत्र मंडल (ट्रस्ट) अक्कलकोट, ने अपना कामकाज उनके काबील मार्गदर्शन तहत शुरू किया I यह धर्मादाय संस्था शुरुवात के दिनोंमें केवल गुरुवार के दिन अन्नदान का प्रयास करती थी I लेकीन अन्य शहरोंसे आनेवाले भक्तोंकी भीड बढने के कारण, कुछ ही दिनोंमें यहां गुरुवार और इतवार के दिन अन्नदान होने लगा I इस पवित्र कार्य को मिलती सफलता और बढते हुए प्रतिसाद को देख श्री जन्मेजयराजे भोसले महाराजने देवस्थान कि उत्तर दिशा में स्थित जगह पर अन्नछत्र शुरू करने कि योजना बनायी I इस काम में महान साध्वी मातोश्री अम्बुताई खंडेराव सरदेशमुखजी ने अपनी जमीन दान देकर एक मां कि तरह अपनी ममता जतायी I अब अन्नछत्र का काम दुगनी गति से शुरू हुआ I अक्कलकोट स्थित कुछ भक्तोने भी मदतस्वरूप कुछ रकम दान दी और स्वामी भक्तोंकी मदद से इस जमीन पर २०० स्वामी भक्तोंकी बैठने कि व्यवस्था हो सके इतना बडा टीन का शेड खडा किया गया I जनवरी १९८९ से दिन में एक बार अन्नछत्र सेवा शुरू हुयी और बढती मांग को ध्यान में रखते हुए यह कुछ ही दिनों में दिन में दो बार होने लगा I .



अन्नछत्र का नयी जगह में स्थलांतर

अन्नछत्र का दिन बर दिन विस्तार हो रहा था I अन्य शहरोंसे आनेवाले भक्तोंकी भीड की वजह से, शुरू शुरू में यहां वर्तमान जगह में बहुत भीड हुवा करती थी और जगह कम पड रही थी I इसलिये, श्री वीरभद्र कोकले जी की देवस्थान की दक्षिण दिशा में मैंदर्गी - गाणगापूर रोड स्थित १६ एकड जमीन नाममात्र कीमत में खरीद ली I श्री कोकले जी वास्तव में यह जमीन बेचना नही चाहते थे; परंतु, यह उनको श्रीमंत विजयसिंहराजे भोसलेजी के कार्यकाल में प्राप्त हुयी थी I इसलिये उन्होने जमीन श्री विजयसिंहराजे भोसले के सुपुत्र श्री जन्मेजयराजे भोसले को सहज मन से अन्नछत्र के पावन कर्म के लिए नाममात्र शुल्क में बेची I जैसेही जमीन प्राप्त हुई उसका लेवलीन्ग किया गया I प्रस्तुत भव्य टीन का शेड जो इसवक्त खडा है, वह सोलापूर के उद्योगपती आदरणीय दत्तान्ना सुरवसे जी की मदद से खडा किया गया I यह नयी शेड अब १००० भक्तोंको एकसाथ महाप्रसाद भोजन देने की व्यवस्था रखता है I इस महाप्रसाद हॉल में बहुत बडा किचन, स्टोअर रूम, क्लीनिंग रूम/ वॉशिंग रूम, हाथ धोने की व्यवस्था और आटा चक्की, मूंगफली, मिरची आदि पीसने की सुविधा, आटा गून्थने की सुविधा, इ. सुविधाए मौजूद है.



डायरेक्टर बॉडी

विश्वस्त मंडळ

नाम पद
1 आदरणीय श्री जन्मेजयराजे विजयसिंहराजे भोसले संस्थापकीय अध्यक्ष
2 श्री अभय गुणधर खोबरे उपाध्यक्ष
3 श्री स्वामीराव शिवराम मोरे सचिव
4 श्री रवींद्र मोहन भंडारे खजांची
5 श्री अमोल (बापू) बालासाहेब शिंदे ट्रस्टी
6 श्री दिलीप शंकर राव कोल्हे ट्रस्टी
7 श्री डॉ. मनोहर कृष्णाजी मोरे ट्रस्टी
8 श्री राजेंद्र शिवशंकर लिम्बीतोटे ट्रस्टी
9 श्री अब्दुल मुहीद गुलाबसो वळसंगकर ट्रस्टी
10 श्री विजयकुमार धोंडीबा हंचाटे ट्रस्टी
11 श्री विजय जन्मेजयराजे भोसले एक्झिक्युटिव्ह ट्रस्टी
12 श्री लक्ष्मण विठ्ठलराव पाटील (कर्मचारी प्रतिनिधी) ट्रस्टी
13 श्री संतोष जगन्नाथ भोसले (कर्मचारी प्रतिनिधी) ट्रस्टी
14 श्रीमती अलका जन्मेजयराजे भोसले (महिला प्रतिनिधी) ट्रस्टी
15 श्रीमती अनिता अभय खोबरे (महिला प्रतिनिधी) ट्रस्टी


अन्नछत्र कर्मचारी

अन्नछत्र कि शुरुवात से आज तक, श्री एस के स्वामी (रोखपाल), श्री धनप्पा कडाप्पा (प्रमुख रसोइया), श्री शहाजी शिवाजी यादव (मैनेजर), श्री प्रकाश शेकाप्पा गायकवाड (मैनेजर), श्रीमती मथुबाई पाटील (महाप्रसाद- महिला प्रमुख), श्रीमत गोदावरी जगन्नाथ भोसले (महिला प्रमुख- तरकारी विभाग), और श्रीमती गौराबाई भुसनुरे (महिला प्रमुख- रसोई) इनका विशेष उल्लेख करना उचित होगा जिन्होने शुरुवात में स्वैच्छिक तत्व पर काम किया और अब अन्नछत्र अच्छी तरह से स्थापित होने पर केवल नाममात्र वेतन के बदले अपनी सेवाए प्रदान करते है I यह प्रामाणिक और इमानदार सेवाए सचमुच सराहनीय है I जैसेही अन्नछत्र की सेवाओंका विस्तार होता चला गया, कर्मचारी जो क्लेरिकल काम में, रसोई में, सर्व्हिंग में, रोटी बनाने में, सब्जी साफ करने तथा काटने में, अनाज साफ करने में, और सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, यात्री निवास और यात्री भुवन के कामकाज में जुटे हुए है, उनकी संख्या अब २५० तक पहुच गई है I सबको उनके काम अनुसार वेतन दिया जाता है I इसीतरह कुछएक स्वामी सेवक अभीभी स्वैच्छिक भाव से काम करते है, उनको वेतन नही दिया जाता I यह सभी कर्मचारी रात दिन खुद को भूलकर पुरी मग्नता से और विनम्रता से काम करते है, और इसका अन्नछत्र एक बडी संस्था होने में सहयोग रहा है I



Initial contribution by the State Transport

The Annachhatra started in 1988 and in 1989 it was registered as a social trust considering the increasing response of devotees. To imbibe and develop the idea of Annachhatra and keep the noble work of free food facility on, the then State Transport officials extended help. The Founder President of Annachhatra Hon’ble Janmejayraaje Vijaysinhraaje Bhosale was working in the accounts department of State Transport Regional Office at Solapur, which has helped the Annachhatra in a great way. Employees from Solapur regional office, Akkalkot depot, and other depots have generously donated upto two and half lakhs rupees for the Annachhatra and contributed to a great extent in establishing of the Annachhatra activity. Annachhatra Trust recognizes the effort. Presently, there are 30-35 State Transport buses coming to Akkalkot for a night hault and Annachhatra looks after the stay and food facility for all the drivers and conductors.



Dignitaries from Maharashtra Visiting Annachhatra.

Since the inception in 1988 (Gurupournima), Annachhatra started growing day by day and in no time it was known as the one and only ideal institution in Maharashtra. Similarly, with the devotion of Shri Swami Samarth spreading vastly, many dignitaries started visiting Akkalkot for darshan and Mahaprasad. They felt content visiting Annachhatra after receiving Mahaprasad. Amongst the political leaders hon’ble Sushilkumarji Shinde, hon’ble Central Power Minister Shivraj Patil Chakurkar, hon’ble Central Home Minister Late Shankarrao ji Chanvhan, Hon’ble Late Vilasrao ji Deshmukh, Hon’ble Shri Vijaydada Mohite Patil, Hon’ble Late Pratapsinhji Mohite Patil, Hon’ble Shri Ranjisinhji Mohite Patil, Hon’ble Shri Chhangan Bhujbal, Hon’ble Minister Shri Handore Saheb, Hon’ble Minister Shri Sunil ji Tatkare Saheb, Hon’ble Minister Late Davkhare saheb, Hon’ble Shri Sachin ji Ahir saheb, Hon’ble Minister Kantatai Nalawade, Shrimat Pushpatai Hire, Hon’ble, Vamanrao Mahadik , Hon’ble Shri Bhai Jagatap, Hon’ble MLA Ulhasji Pawar, Hon’ble Anna Thorat, Hon’ble Shri Narayan Rane, Hon’ble Fundkar, Hon’ble Late Gopinath ji Munde, Hon’ble Shri Babanrao Pachpute, Forest Minister Hon’ble Shri Vinay ji Kore, Hon’ble Shri Anand ji Devkate, Hon’ble Shri Sudhakarpant Paricharak, Hon’ble Shri Digvijaysingh, Hon’ble CM (M.P.) Dhairyasheel Mohite Patil, Shri N S Farande, Hon’ble Shri Hasan Mushrif, Hon’ble MP Chandrakant Khaire and others expressed satisfaction after visiting Annachhatra about its work. Similarly, respected Shri Vasudevan, Shri Pravinsinh Pardeshi, Shri Dipak Kapoor, Shri Apurvachandra M. Jadhav, Shri Arun Bongirwar, Shri Jagadish Patil, Shri Anil Diggivar, Shri Bhagwantrao More, Shri Dhananjayrao Jadhav, Shri Arvind Inamdar, Hon’ble Shri Reddy, Shrinivasan ji, etc. Hon’ble MLA Siddharam Mhetre, Hon’ble Minister Shri Ranjitkumar, Dr. Rajendra Bhosale, District Collector, Shri Vidyadhar Anaskar, Finance Expert, Pune, Shri Rajendra Bharud, Hon’ble Shri Vijay Deshmukh, Hon’ble Shri Ashishji Phadanvis, Industrialist Nagpur, Prof. Vyankatesh Abadeo, VHP, Hon’ble Shri Pravin Togadiya, VHP, respected Yog Guru Swami Ramadev Baba, Hon’ble Shri Maheshji Rabade- PA to Lata Mangeshkar ji, respected Shri Vishwas Nangare Patil, Special Police Inspector General, Hon’ble Shri Diwakar Ravate- Transport Minister, Hon’ble MLA Babandada Shinde, Hon’ble MLA Rajan Patil, Hon’ble MLA Ajitdada Pawar- Hon’ble Ex Dy CM, Hon’ble Shri Veeresh Prabhu, Hon’ble Shri Eknath Khadase- Ex Minister, Hon’ble Mrs Chitra Wagh, hon’ble Mrs Yashomati Thakur, Hon’ble MLA Sachin Ahir- Ex Minister, Hon’ble shri Balasaheb Dabhekar, Pune, Hon’ble Mrs Neelam Gorhe, Mumbai, Cricketer Hon’ble Shri Dileep Vengasarkar, Hon’ble Shri Amit Deshmukh, Latur, Hon’ble Mrs Vidya Thakur, Hon’ble Ex CM Shri Ashokrao Chauvhan, respected Mr and Mrs Prakash Amate, Dr. Tatyarao Lahane, Eye- Specialist, Hon’ble Shri Sahariya- Election Commissioner, Hon’ble Shri Hanmantarao Gaikwad, BVG Group, respected Shri Sudhir Gadagil, respected Adv. Shri Ujjaval Nikam, Hon’ble MP Sanjay (Nana) Kakade, Hon’ble Shri Virendra Kirad, Pune. Also, dignitaries and adhyatmik gurus viz., Hon’ble MP Shri Bhaiyyumaharaj, Indore, respected 1008 Chandrashekhar Shivachary Mahaswamiji, Dnyanapeeth Kashi, respected Anna maharaj Waikar, respected Katkar Maharaj, respected Dighe Mavashi, Todkar Maharaj, Mungle Maharaj, respected Zurale Maharaj, respected Bhau Thaware visited Annachhatra and expressed satisfaction about the ongoing work and conveyed their blessings for the same.

Cooperation to Annachhatra

Adv. Nitin Vishnusaheb Habib stood selflessly with Annachhatra trust to look after the legal formalities of it. Similarly, Adv. Sureshchandraji Bhosale, Pune is looking after the legal formalities and matters of Annachhatra at present; and Adv. Nitin Habib, solapur works as a legal advisor for Annachhatra. Locally Adv. Santosh Khobare looks after the legal aspects and extends valuable cooperation. Since the beginning till date, CA G M Pavale, Solapur looks after the accounts and audits for Annachhatra. He works for a nominal remuneration as swami seva. About audits he extends valuable guidance and locally Shri Omkareshwar Utage, CA looks after the accounts and audits. Similarly, Shri Vidyadhar Anaskar, Pune, financial expert and Financial Advisor of Reserve Bank also extends his guidance from time to time. Because of the strong support of the above, Shri Swami Samarth Annachhatra Mandal has achieved spectacular progress.




Contribution of Late Shivajirao Pise (Maharaj) and Late Balasaheb Shinde

Hon’ble Late Shivajirao Pise Maharaj and Late Balasaheb Shinde from Solapur have contributed since the beginning of Annachhatra. Also, they offered valuable guidance and strong support from time to time. In the days of adversity, both offered moral support to Hon’ble Janmejayraje Bhosale and raised his morale.



People who donated agricultural land to the organization

Influenced by the noble work of Annachhatra, few devotees have donated their agricultural land to the organization and contributed to Shri Swami Seva:
• Late Babasaheb Govindrao Deshmukh, at post Ingalagi, donated his 37 acres of horticultural land by a gift deed.
• Late Virappa Pirappa Biradar, at post Baslegaon, Tal. Akkalkot donated 19 acres of horticultural land by a gift deed.
• Late Anandaro More, at post Abawadi, Akkalkot, donated his 2.5 acres of agricultural land to the Annachhatra.
• Late Vasudev Bandoba Kadam, at post Tambole, Tal. Mohol donated 24 acres of his agricultural land
• Shri Potdar, Akkalkot donated his land at Mauje Gaudgaon measuring 2.5 acres to the Annachhatra.
• Annachhatra Mandal has purchased 512 acres of land adjoining Maindargi road from Shri Kumbhar, Akkalkot at a nominal price for its future activities and initiatives.
• Also, Annachhatra Mandal has purchased another land measuring 5 acres with a construction of 72 rooms on it for future educational projects purpose.