महाप्रसाद


अन्नछत्र में महाप्रसाद व्यवस्था

कहते है, अन्न भगवान का रूप होता है! अन्नदान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है!
अन्नदान की व्याख्या और व्याप्ती बहुत बडी हैI मानवसहित इस पृथ्वीतल के सभी प्राणीजनोंको अन्न की बेहद आवश्यकता होती है I अन्न ग्रहण करने से पेट की भूख शांत हो जाती है I अन्न में साक्षात ईश्वर का वास होता है I इसीकारण, महाप्रसाद ग्रहण करने से मनुष्य तृप्त हो जाता है I उसे एक अद्भुत मानसिक शांती मिलती है, समाधान प्राप्त होता है I यह समझते हुए श्री जन्मेजयराजे भोसले जी ने अपने सहकारीजनोंके साथ मिलकर श्री गुरुपौर्णिमा के शुभ अवसर पर श्री स्वामी समर्थ अन्नछत्र मंडल की स्थापना की और श्री स्वामी समर्थ महाराज के दर्शनोंके लिए आनेवाले भक्तजनोंके महाप्रसाद की सुविधा की I आज के दिन इस अन्नछत्र में दोनो समय मिलकर १५,००० से ज्यादा श्रद्धालू महाप्रसाद के भोजन का लाभ उठा सकते है ऐसी आसन व्यवस्था है I



महाप्रसाद के लिए आवश्यक अनाज


महाप्रसाद बनाने के लिए आवश्यक सामग्री, जैसे की गेहू, चावल, अंकुरित धान, अरहर की दाल, शक्कर, सुजी, गूढ, चना, इ. अनाज तथा घी, मूंगफली का तेल, मसाले, इ. की खरीददारी के लिए और उसपर नियंत्रण रखने के लिए, ट्रस्टी, सदस्य और कर्मचारी वर्ग की नियुक्ती की गई है I अनाज की खरीददारी अत्यंत निगरानी के साथ और पूछ्ताछ के बाद की जाती है I खरीदे जानेवाले अनाज और मसालों की क़्वालिटी अच्छी हो इसकी तरफ पुरा ध्यान दिया जाता है I उसीतरह बहुतसे श्रद्धालू अनाज के रूप में दान देते है, उसे स्वीकार कर उन्हे बाकायदा रसीद दी जाती है I जमा अनाज अन्नदान के लिए इस्तेमाल होता है I अनाज रखने के लिए ४०' * २०' आकार के बडे गुदाम की व्यवस्था की गई है .



दैनंदिन रूप से लगने वाली सब्जी तरकारी



महाप्रसाद बनाने के लिए आवश्यक सब्जी तरकारी स्थानिक तौर पार खरीदी जाती है I इस काम के लिए अलगसे ट्रस्टी, सदस्य और कार्माचारीयोंकी नियुक्ती की गई है I यह सब्जी तरकारी हररोज सुबह स्थानिक मंडी से खरीदी जाती है, जैसे की आलू, शिमला मिर्च, फूल गोभी, पत्ता गोभी, पालक, टोमाटो, ककडी, मेथी, शेपू और अन्य सब्जीया मौसम के अनुसार ध्यान से और अच्छे योग्य दामोंमे खरीदी जाती है .



महाप्रसाद गृह और महाप्रसाद व्यवस्थापन और कर्मचारी

महाप्रसाद व्यवस्था अत्यंत नियोजनपूर्व और अनुशासनपूर्वक होने के लिए, ४ व्यवस्थापक/ मैनेजर्स की नियुक्ती की गई है I उनके सुपरव्हिजन में महाप्रसाद वितरीत करने का कार्य संपन्न होता है I महाप्रसाद की बैठक व्यवस्था में भक्तजनोंको बिठाने का काम, थालियां, कटोरी, ग्लास ई. लगाने का काम, करने के लिए १०० से ज्यादा कर्मचारी काम करते है I वे महाप्रसाद परोसने का काम बडी लगन से और अनुशासन से करते है I किचन में ५० के उपर महिलाये रोटीयां बनानेका काम करती हैI कितनी भी भीड हो, लेकीन वे अपना काम बडेही अनुशासन से करती है, और कभीभी उनके काम में देरी नही होती I महाप्रसाद भोजन के लिए आवश्यक सब्जीया ठीक करने का और काटने का काम करने के लिए १५ महिला कर्मचारी तैनात है और वे बडे दिल से अपना काम करती है I महाप्रसाद भोज में इस्तमाल किया जानेवाला अनाज साफ करने के लिए २० महिला कर्मचारी है और ये महिलाये अपना काम बडे अनुशासनसे निभाती है I भोजन के बाद थालीयां, कटोरी, ग्लास, इ. बर्तन साफ करने के लिए २० महिलाओंकी नियुक्ती की गई है और ये महिलाये उनका काम बिना थके करती है I



अन्नछत्र में भक्त जनोंके लिए अल्प समय में की गई सुविधाये

अन्नछत्र का रोजाना काम करने के लिए कर्मचारी वर्ग की नियुक्ती की गयी है I महाप्रसाद भवन में अन्नदान और कन्स्ट्रक्शन के काम के लिए दी जाने वाली दान की रकम जमा करने के लिए लिपिक और रोखपाल नियुक्त है, और वे बाहर के शहरसे या गावोंसे आनेवाले भक्तोंको उनके दान के लिए बाकायदा रसीद देने का काम करते है I बडे दानी व्यक्तीयोन्को श्री स्वामी समर्थ महाराज की प्रतिमा और शाल देकार उनका सम्मान किया जाता है I आनेवाले सभी भक्तजनोंकी महाप्रसाद भोजन व्यवस्था करना, उनको अन्नछत्र की तथा चल रहे निर्माण कार्य के बारेमें जानकारी देना, इ. काम लिपिक और रोखपाल करते है I कई श्रद्धालू पोस्ट की सहायता से भी दान की रकम भेजने का प्रयास करते है, उनको रसीद भेजना, विभूती और प्रसाद भेजना होता है I जिन लोगोने कुछ रकम आजीवन समय के लिए दान के तौर पर रखी है, उनको पत्र और विभूती भेजना, इ., काम लिपिक और रोखपाल करते है I कायम स्वरूप से जिन्होने ट्रस्ट के पास कुछ रकम रखी है, या जो अन्नदान के लिए या निर्माण कार्य के लिए दान करते है, उनसे संपर्क बनाए रखना, संबंधित लोगोंसे पत्रव्यवहार करना, अन्नछत्र के स्थापना दिवस तथा गुरुपौर्णिमा उत्सव की निमंत्रण पत्रिका और पत्र भेजना, इ., I स्वामी जयंती और गुढीपाडवा के अवसर पार शुभेच्छा पत्र भेजना I अन्नछत्र को सद्भावना भेंट देनेवाले मान्यवरोंका उचित सम्मान करना, उनका पता, तथा अभिप्राय लेना, सरकारी, तथा सेवाभावी संस्थाओंसे संपर्क बनाये रखना, उसके अनुरूप पत्रव्यवहार करना, इ. कामोंके लिए भी लिपिक और कार्यालयीन अधिक्षाकोंकी नियुक्ती की गयी है I अन्नछत्रको रोजाना मिलने वाली हर प्रकार की दान रकम और वस्तुओं का हिसाब रखना, अनाज, कार्माचारीयोंका वेतन, अन्य खर्चे, इन सबका हिसाब रखना, तथा चैरिटी कमिशनर के ऑफिस से जुडे कामकाज की पूर्तता करणा और संस्था ने नियुक्त किये ऑडीटर से ऑडीट करवाना, इ., काम करने के लिए लिपिक नियुक्त किये गये है I



नया अस्थायी स्वरूप महाप्रसाद भवन

अन्नछत्र मंडलने अब पुरानी जगह पर ४५ करोड रुपये की लागत से नयी ५ मंजिल इमारत का निर्माण करने का निर्णय लिया है I यह महाप्रसाद भवन बनने में २ से ३ वर्ष का समय लगेगा I तब तक भक्तोंकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुराने महाप्रसाद भवन के बाजू में ही अस्थायी स्वरूप का महाप्रसाद गृह /भवन शेड का निर्माण किया गया है I यह शेड आधुनिक और दरबार हॉल स्वरूप है I यहां एकसाथ १००० श्रद्धालू महाप्रसाद भोजन का लाभ उठा सकते है I इसके निर्माण में संगमरमर, ग्रेनाईट, तथा सिलिंग के लिए उच्च श्रेणी की सामग्री का इस्तमाल किया गया है I यहां बनाया गया किचन, बर्तन साफ करने की जगह, सब्जी विभाग, रोटी विभाग एकदम आधुनिक तरीके से निर्माण किया गया है I हरेक विभाग के कर्मचारी बडीही विनम्रता से सेवा करते है I नये महाप्रसाद गृह के सामने भव्य दीपमालाए और कपिला गाय शिल्प बडे आकर्षित करते है I श्री स्वामी समर्थ महाराज की २५ फीट की प्रतिमा और बांबी से प्रकट होने की प्रतिकृती भक्तोंकी श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बनी हुयी है I अन्नछत्र परिसर में मेन गेट से पिछाडी तक जो आउट गेट है, वहां तक का रास्ता टार रोड बनाया गया है I इसमे करीब सवा करोड रुपयोंकी लागत आयी है I नये टार रोड की वजह से मिट्टी, धूल, कीचड इ., से होनेवाली परेशानी से हमेशा के लिये राहत मिली है I इस रास्ते पर सफेद पट्टीयां और रिफ्लेक्टर शानदार दिखते है I भक्तजन इन नयी सुविधाओंसे बहुत समाधानी है I महाप्रसाद गृह के करीब खडी श्री स्वामी समर्थ महाराज की आशीर्वाद देती मूर्ती सारे श्रद्धालूओंका आकर्षण बनी हुयी है I इसके साथ ही महाप्रसाद गृह के बाजू में बने हुये कक्ष और खास मान्यवरोंका कक्ष भी आकर्षक और सुंदर तरीके से बनाये गये है I सन्माननीय अध्यक्ष महोदय का कक्ष भी सुंदर बना है I यात्री निवास के सामने बनी हुयी पार्किंग सुविधा भी टार रोड से बनी है I इस पार्किंग की उत्तर दिशा में पुरे अन्नछत्र परिसर में जमने वाला बारीश का पाणी जमा करने की सुविधा उपलब्ध है I यह पाणी एक गटर के मार्ग से विशेष रूप से निर्मित गढढे में जमा किया जाता है I यह गढढा (जल पुनर्भरण -रेन हार्वेस्टिंग) ३०*३०*३० फीट आकार का एक कुंए की तरह बना है I इस सुविधा से पर्यावरण में समतोल बनाये रखने में मदद होती है और जमीन के नीचे पानी का स्तर बढाने में मदद होती है I



शिवस्मारक (गड-किले सृष्टी)

भारतरत्न गानसम्राज्ञी आदरणीय लतादीदी मंगेशकर जी की इच्छा थी की युवावर्ग को प्रेरणा देने के लिये और जीवन में आदर्श होने के लिये अन्नछत्र परिसर में शिवस्मारक (गड किले सृष्टी) बने I उन्होने यह संकल्पना आदरणीय जन्मेजयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज के सामने रखी I उन्होने यह संकल्पना आदर्श मानके शिवस्मारक निर्मिती कार्य की शुरुवात की I इस कार्य में आदरणीय इतिहासकार बाबासाहेब पुरंदरेजी का मार्गदर्शन मौल्यवान साबित हुआ I छत्रपती शिवाजी महाराज की अश्वारूढ प्रतिमा कोल्हापूर के शिल्पकार श्री संताजी चौगुले जी ने बनायी है I गड किले सृष्टी बनाने का कार्य पुणे के शिल्पकार श्री विवेक खटावकर जी ने किया है I इस शिवस्मारक के सामने बहुत भव्य फाउंटन बनाया गया है और लॉंन गार्डन का निर्माण किया गया है, जिसमे संगमरमर की बेंच, स्टील रेलिंग, फ्लोअरिंग पेव्हर ब्लॉक, इ. और गड किलोंका इतिहास की शिलाए लगी हुयी है I यह सुविधाये अत्यंत कम समय में उपलब्ध करके ट्रस्ट ने करोडो रुपयोन्की लागत से भव्य और सुंदर शिवस्मारककी निर्मिती की I इस शिवस्मारक की ओर जाने के लिए पाथवे मौजूद है जिसके दोनो तरफ सुंदर और नक्ष बने हुये ८० बिजली के खंबे बने है I यह स्मारक सारे श्रद्धालूओंके लिए और अक्कलकोटके लोगोंके लिए एक बडा आकर्षण बना हुआ है I इस शिवस्मारक का लोकार्पण १ मई २०१८ को महाराष्ट्र दिन के शुभ अवसर पर किया गया I



आऊट डोर जीम (खुली व्यायाम सुविधा)

बाहर से आए हुए श्रद्धालूओंकी सुविधा के लिए शिवस्मारक के पास और यात्रीभुवन से लाग कर एक आउट डोर जीम का निर्माण किया गया है I इस अप्रतिम व्यवस्था में १३ प्रकार के कसरत के साधन उपलब्ध है, जिसमे ९ साधन पुरुषोन्के लिए, तथा ४ साधन महिलाओन्के लिए मौजूद है I यह साधन आधुनिक है, इसके फ्लोअरिंग में लॉंन है I इन सभी साधानोंकी जानकारी और इनके इस्तमाल की जानकारी के बारे में जगह जगह पार बोर्ड लगाये गये है I यह जिम पूर्णतः फ्री है और १६ वर्ष के उपर के सभी लोगोंको इस्तमाल के लिए उपलब्ध है इस जिम की वजह से बाहर से आए श्रद्धालू और अक्कलकोट निवासी लोगोंको बडी सुविधा प्राप्त हुयी है I इसका समय सुबह ५ बजे से ९ बजे तक और शाम को ६ बजे से ९ बजे तक खुला रहता है I इस जिम की वजह से बाहर से आए श्रद्धालू और अक्कलकोट निवासी लोगोंको बडी सुविधा प्राप्त हुयी है I इस जिम का उद्घाटन १ मई २०१८ को हुआ है इस जिम की वजह से बाहर से आए श्रद्धालू और अक्कलकोट निवासी लोगोंको बडी सुविधा प्राप्त हुयी है I ट्रस्ट के अध्यक्ष आदरणीय जन्मेजयराजे भोसले महाराज जी ने समाज की तरफ अपनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए और श्रद्धालूओंकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस जिम में १०,००,००० रुपये के साधनोंका इस्तमाल किया है और वर्तमान समय में यह जिम रोजाना इस्तमाल किया जाता है I



आऊट गेट, बुम बॅरीअर, भव्य टार रोड और पार्किंग




अन्नछत्र के पीछे आउट गेट का निर्माण किया गया है I समारोह के अवसर पर और, छुट्टीयोंके दौरान, और त्योहारोंके अवसर पर यहां भक्तोंका काफिला लगा रहता है I बहुत भीड इकठ्ठा होती है I ऐसे समय पर ट्राफिक जाम ना हो इस विचार से इस गेट का निर्माण किया गया है I यह गेट मैंदर्गी -गाणगापूर रोड पर स्थित है I अंदर की तरफ भव्य पार्किंग और टार रोड बनी हुयी है I इस पार्किंग में रोजाना बडी गाडिया, प्रायव्हेट टूरिस्ट वेहिकल, कार, जीप, एस. टी बसेस, इ. रुकते है I



टीलेपर नियोजित लॉन-गार्डन




इस आउट गेट के करीब एक बडासा टीला है I इस टीलेपर श्रद्धालूओंके मनोरंजन के लिए और बच्चोंको खेलने के लिए सुंदर, भव्य लॉंन गार्डन (बागीचा) का निर्माण हो रहा है I इसमे पानी का धबधबा भी शामिल है और इस कार्य में लाखो रुपयोन्की लागत की संभावना है I निर्माण कार्य चल रहा है और जल्द ही यह गर्दन श्रद्धालूओंकी सुविधा में उपलब्ध होगा I



नियोजित श्री स्वामी समर्थ जीवन चरित्र दर्शन म्युरल्स






आउट गेट और यात्रीभुवन के करीब, म्युरल का काम चल रहा है जिसमे श्री स्वामी समर्थ महाराज के जीवन चरित्र के कुछ प्रसंगोंका चित्रण किया गया है I यह म्युरल्स इस पावन इच्छा से बनाये जा रहे है जिससे श्री स्वामी समर्थ महाराज की ओर भक्तोंकी श्रद्धा और भक्ती में वृद्धी हो I इस म्युरल प्रोजेक्ट में करीब कई लाख रुपयोन्की लागत आयी है I ट्रस्ट के आउट गेट के पहले, और यात्रीभुवन बिल्डींग के कॉर्नर पर भव्य जगह पर श्री स्वामी समर्थ महाराज की जीवन चरित्र के दर्शन स्वरूप कुछ शिल्प दीवार पर बनाये जा रहे है I श्री स्वामी समर्थ महाराज के जीवन के कुछ एक चुनिन्दा प्रसंग इन शिल्पोन्के माध्यम से खडे करने का प्रयास किया जा रहा है I इस कार्य में लाखो रुपयोन्का खर्च अपेक्षित है और यह काम केवल श्री स्वामी समर्थ महाराज के भक्तोंमे उनकी श्रद्धा में वृद्धी हो, और उनकी भक्ती का प्रसार हो यह पावन विचार मौजूद है I



नियोजित रुफ सोलार निर्मिती प्रकल्प

हाल ही में, अन्नछत्र कई सुधारणाए और सुविधाए बनाता हुआ प्रगती पथ पर चल रहा है I नयी इमारतोंका निर्माण कार्य भी हो रहा है I भव्य निवासी इमारत, और भव्य महाप्रसाद हॉल का भी निर्माण हो रहा है I अनेक सुविधाये जैसे की ए सी लिफ्ट, LED स्क्रीन, लाईट्स, इ. भी उपलब्धी करायी गयी है I इन सुविधओंकी वजह से बिजली की लागत में वृद्धी हुयी है I इसी कारण, नैसर्गिक संसाधानोंका पूर्ण रूप से उपयोग करने की इच्छा से सोलर रूफ प्रोजेक्ट का निर्माण नियोजित है और यह जल्दीही सेवा में सादर होगा I यह प्रोजेक्ट पार्किंग और आउट गेट के रूफ पर नियोजित है I इस प्रोजेक्ट के वजह से बिजली की लागत में काफी तौर पर बचत होगी और हर महिने के बिजली के बिल में कटौती होगी ऐसी आशा है I इस प्रोजेक्ट से १२४ KV पावर का निर्माण अपेक्षित है और इसका निर्माणकार्य पुणे स्थित सोलोरीच कंपनी को दिया गया है I



नियोजित स्थायी महाप्रसादगृह

अन्नछत्र कार्य का विस्तार बडा तेजी से हो रहा है I अक्कलकोट आनेवाले श्रद्धालूओंकी संख्या में भारी मात्रा में वृद्धी हो रही है I इसी कारण, ट्रस्ट ने यह निश्चय किया है कि वर्तमान अन्नछत्र महाप्रसाद गृह की जगह पर एक ५ मंजिल भव्य आकर्षक इमारत का निर्माण किया जायेगा I यह निर्माण कार्य ३ से ५ साल का अवधी ले सकता है I इसलिये इस वास्तू के बगल में एक अस्थायी रूप के टीन शेड का निर्माण किया गया है I नियोजित वास्तू का निर्माण खर्च ४५ करोड रुपये है I वह इमारत पुरी तरह से एअर कंडीशन्ड होगी और प्रसाधन गृह, लिफ्ट, डोनेशन सेंटर, इ. सुविधाये होंगी I नये महाप्रसाद हॉल में २००० श्रद्धालूओंको एकसाथ महाप्रसाद भोजन परोसने की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी और यह ३ मंजीलोपर स्थित होगा I यह इमारत बहुत सुंदर और भव्य होगी और भक्तजनोंको बहुत सुविधाजनक साबित होगी I इसमे एक मंजिल पर वेटिंग हॉल, एक मंजिल पर किचन और रोटी सेक्शन, सब्जी सेक्शन तिसरी मंजिल पर इस तरह से प्रस्तावित है I यह हॉल जल्दही भक्तोंकी सेवा में सादर होगा I



सुरक्षा व्यवस्था

अक्कलकोट आनेवाले भक्तोंकी बढती संख्या को ध्यान में रखते हुए और ट्रस्ट की बढती हुयी कार्यविधीयोंको ध्यान में रखते हुए, अन्नछत्र की सुरक्षा में वृद्धी करना उचित महसूस हुआ I और एक कार्यक्षम सुरक्षा व्यवस्था का होना भी आवश्यक है I वर्तमान में नियुक्त सुरक्षा रक्षक पुरी लगन से रात दिन सुरक्षा व्यवस्था में लगे रहते है I मेन सिक्युरिटी पोस्ट गेट के पास स्थित है और कुल मिलाकर ३२ सुरक्षा रक्षक नियुक्त किये गये है जिनमें एक मुख्य सुरक्षा अधिकारी है I मेन गेट, महाप्रसाद हॉल, एन्ट्रन्स गेट, महाप्रसाद हॉल में स्थित मंदिर, और डोनेशन बॉक्सेस, श्री स्वामीविघ्नेश मंदिर और पार्किंग स्थल, इन सभी जगहोपर सुरक्षा रक्षक तैनात रहते है I वे शिफ्ट में काम करते है I महाप्रसाद हॉल में भक्तोंकी आवाजाही, अन्नछत्र परिसर में आनेवाले वाहन, भीड का नियंत्रण और ट्राफिक नियंत्रण इ. काम में यह सुरक्षा रक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है I



अन्नछत्र में होने वाले रोजाना कार्यक्रम

अन्नछत्र में रोजाना सुबह श्री शमी विघ्नेश गणेश जी की आरती, महाप्रसाद गृह में अन्नपूर्णा जी की आरती, पुराने अन्नछत्र में जहां स्वामीजी बैठकर भिक्षा स्वीकार करते थे, उस जगह और स्वामी मंदिर के दक्षिण द्वार के बगल में स्थित ऑफिस में की जाने वाली पूजा, संस्था के पंडित करते है I अन्नछत्र का दैनंदिन कार्यक्रम सुबह ११ बजे शुरू होता है I रु. ५०१/- की राशी दान करने वाले श्रद्धालू एवं कायम स्वरूप राशी दान करने वाले श्रद्धालू तथा मान्यवर अतिथी / डोनर्स के हाथ से श्री स्वामी महाराज को महानैवेद्य अर्पण करने के बाद, महाप्रसाद गृह में आरती संपन्न होती है I इसके बाद संकल्प किया जाता है और बाद में उपस्थित श्रद्धालूओंको महाप्रसाद दिया जाता है I महाप्रसाद के लिए बैठने पर प्रसाद परोसा जाने तक श्री स्वामी नामस्मरण किया जाता है I एक के बाद एक भक्तोंकी लाईन बिठाके प्रसाद परोसा जाता है I महाप्रसाद सुविधा दोपहर को तीन बजे तक उपलब्ध है I उसके बाद यह कार्य समाप्त होता है I इसी दौरान आये हुए मान्यवर अतिथी, तथा दानी व्यक्तीयोन्का सम्मान किया जाता है I उन्हे सम्मान में श्री स्वामी समर्थ की प्रतिमा, शाल और श्रीफल दिया जाता है I मान्यवर और अतिथीयोंका महाप्रसाद और व्यवस्था के बारे में अभिप्राय लिया जाता है और उनसे संपर्क बनाने के लिए जानकारी ली जाती है I महाप्रसाद के दौरान अनेक श्रद्धालू अपनी इच्छा से दान की राशी जमा करते है, उन्हे बाकायदा रसीद दी जाती है I इस कार्य के लिए लिपिक और कैशियर नियुक्त है I यहां हररोज करीब १५,००० से ज्यादा लोग महाप्रसाद का लाभ उठाते है I



रु. ५०००/- संकल्प और रू. ११,००१/- की अन्नदान चिरंतन ठेव योजना

यह योजना स्वामी भक्तोंको आकर्षित करने वाली है I इस योजना के तहत स्वामी भक्त रु. ११,००१ /- की राशी को चिरंतन स्वरूप से ट्रस्ट के पास जमा कर सकते है और उनकी इच्छा से साल में किसी विशिष्ट दिन या तिथी को उनके नाम से अन्नदान किया जा सकता है I हर साल इस दिन या तिथी को वे वैयक्तीक रूप से उपस्थित रह सकते है I अगर वे वैयक्तिक रूप से उपस्थित नहीं रह सकते, तो उनके लिए प्रसाद और विभूती पोस्ट के जरिये भेजी जाती है I अगर वे वैयक्तिक रूप से उपस्थित हो, तो उनके हाथो महाभोग चढाकर संकल्प किया जाता है और फिर महाप्रसाद बाटा जाता है I इसके अलावा भी अन्नदान करने के लिए कुछ योजना है I रु. ५,०००/- चिरंतन रूप से दान करने पर भक्तोंकी इच्छानुरूप साल में किसी विशिष्ठ तिथी या दिन को अन्नदान संकल्प उनके नाम से करने की सुविधा है I



इन्कमटॅक्स में ८०G के अनुसार छूट

अन्नछत्र के कार्य का स्वरूप जैसे बढता जा रहा है, वैसेही अन्य शहरोंसे आने वाली दान की राशी में भी बढत हो रही है I आयकर कानून, १९६१ के कलम ८० जी के तहत ऐसी दान राशी पर आयकर में छूट उपलब्ध है I इस छूट का लाभ बहुत श्रद्धालू जो दान करते है, उन्हे मिलता है I इसके लिए आवश्यक प्रमाण पत्र आयकर आयुक्त कार्यालय, पुणे से प्राप्त किया गया है I



अन्नछत्र में संपन्न होने वाले उत्सव

श्री स्वामी समर्थ महाराज की इस पावन भूमी में चल रहे अन्नदान के महान कार्य के साथ साथ श्री स्वामी समर्थ की असीम कृपा से अन्नछत्र मंडल श्री दत्त जयंती, श्री स्वामी समर्थ जयंती और पुण्यतिथी, गुरुप्रतिपदा (गाणगापूर यात्रा), गुरुपौर्णिमा, आदि उत्सव बडी धूम से मनाता है I इन उत्सवोंके दौरान बाहर से लाखोंकी तादाद में श्रद्धालू यहां आते है और श्री स्वामी समर्थ महाराज के दर्शन कर महाप्रसाद का लाभ उठाते है I इन विशिष्ट दिनोंपर पांच पकवान बनाये जाते है I रोटी, दो सब्जीया, दाल, खीर, हलवा, बुंदी के लड्डू, मीठे चावल, पुरण पोली आदि पकवान बनते है I इन उत्सवोंके दौरान बाहर के गावोंसे कई लाख लोग यहां आते है I उत्सव के दिन अन्नछत्र फूलो से और केसरी रंग की पताका से सजाया जाता है I



श्री गुरुपौर्णिमा और अन्नछत्र का वर्धापन दिन,
धर्म संकीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम

२९ जुलै १९८८ गुरूपौर्णिमा या दिवशी श्री स्वामी समर्थ अन्नछत्र मंडळाची स्थापना झाली. त्यामुळे श्री गुरूपौर्णिमा आणि वर्धापन दिन हा उत्सव या संस्थानमध्ये विशेषत्वाने आणि भव्य दिव्य प्रमाणात साजरा केला जातो. या वर्षी १८ जुलै २००८ रोजी गुरूपोर्णिमा व अन्नछत्राश्री स्वामी समर्थ अन्नछत्र की स्थापना २९ जुलाई १९८८ को हुयी थी I इस लिए गुरुपौर्णिमा और वर्धापन दिन विशेष रूप से उत्सव के स्वरूप में मनाए जाते है I इस वर्ष १८ जुलाई २००८ को अन्नछत्र का २१ वा वर्धापन दिन बडी धूम से मनाया गया I हर साल गुरुपौर्णिमा / वर्धापन दिन के दिन मान्यवर अतिथी जन को आमंत्रित किया जाता है और इनके हाथोसे श्री स्वामी समर्थ महाराज की पंच पकवान का महाभोग चढाया जाता है I महाभोग के बाद महाप्रसाद गृह में महाआरती संपन्न होती है और संकल्प किया जाता है I इसके बाद स्वामी भक्तोंको महाप्रसाद बाटा जाता है I इसी दौरान प्रमुख मान्यवर, और अतिथी जन और दानी व्यक्तीयोन्का श्री स्वामी समर्थ प्रतिमा, शाल, श्रीफल देकार उचित सम्मान किया जाता है I