सेवा


बाहर के शहरोंसे आए हुए स्वामीभक्तोंके लिए निवासव्यवस्था

बाहर के गांवो से और शहरोंसे आनेवाले बहुत श्रद्धालूओंके भोजन की व्यवस्था महाप्रसाद से हो गयी I लेकीन हजारोन्की तादात में आनेवाले स्वामी भक्तोंके निवास की उचित व्यवस्था न होने के कारण, उन्हे श्री स्वामी महाराज की सेवा में परिपूर्ण रूप से शामिल होने में दिक्कत आ रही थी I इस असुविधा को हटाने के लिए अन्नछत्र मंडलने करीब १५ करोड की लागत का प्रकल्प शुरू किया और सर्वप्रथम भक्तोंकी निवास की व्यवस्था करने का निश्चय किया I


  • • • रु. ३९,०००/- कमरा निर्माण दान कर्मी योजना - यह योजना यात्री निवास १ में है, और मर्यादित स्वरूप में होने के कारण, यह अब पूर्ण हो चुकी है I

    - o इस योजना के तहत ६६ कमरे है, और एक कमरे के लिए कम से कम रु ३९,०००/- का निधी दान में देना अपेक्षित है और दान देनेवाले का नाम संबंधित कमरे को दिया गया है I


  • • • रु. ५१,०००/- कमरा निर्माण दान कर्मी योजना- यह योजना पूर्ण हो चुकी है और यह यात्री भुवन २ में भक्तोंकी सेवा में उपलब्ध करायी गयी है I




  • अन्नछत्र में आनेवाले यात्रीयोंके निवास के बुकिंग की व्यवस्था

    संस्थान के यात्री निवास १ और यात्री भुवन २ इन इमारतोंमे निवास के लिए अॅडव्हान्स बुकींग व्यवस्था सहज और सुलभ तरीके से उपलब्ध हैI अगर किसीको अक्कलकोट दर्शन करने और प्रसाद लेनेके लिए आना हो और अक्कलकोट में निवास करना हो, तो वे ०२१८१/२२२५५५ यात्री निवास १ और ०२१८१/२२२५८७ यात्री भुवन २ इन टेलिफोन नंबर्स पर फोन करके अॅडव्हान्स बुकींग कर सकते है I अॅडव्हान्स बुकींग ना करते हुए भी वे अन्नछत्र में आने के बाद इस इमारत में में जाकर डायरेक्ट बुकिंग कर सकते है I इस तरह से भी आसानीसे कमरा उपलब्ध हो सकता है, क्योंकी यह दोनों इमारते बडी क्षमता की है, और इस वजह से कमरा न मिलने की संभावना नही है I




    श्री शमिविघ्नेश गणेश मंदिर व सभा मंडप

    निवास व्यवस्था के लिए इमारत बनाने के वक्त और अन्य निर्माण कार्य के लिए इस परिसर में जमीन का लेव्हलिंग करते वक्त, शमी वृक्ष इस जमीन के बीचोबीच पाया गया I इस जगह पर १९९४ में शमी वृक्ष के नीचे श्री गणेश की स्थापना की गयी और छोटे मंदिर का निर्माण किया गया I धीरे धीरे भक्तोंको इस मंदिर की मान्यता का परिचय होने लगा, और यह मनात पुरा करने वाला मंदिर ऐसी मान्यता प्राप्त हुयी I इस गणेश जी का नामकरण, "शमीविघ्नेश गणेश" किया गया I दर्शन में दिन ब दिन बढते श्रद्धालूओंकी संख्याको ध्यान में रखते हुए, मंदिर का पुनर्निमाण किया गया और एक ४२' *३०' आकार के सुंदर मंडप का निर्माण करना निश्चित हुवा I इस मंदिर के पीछे की तरफ निवास के लिए १२' * १५' के आकार के ८ कमरे, प्रसाधन गृह के सहित निर्माण किये गये I श्री गणेश मंदिर के नजदीक श्री हनुमान जी का छोटा मंदिर और उसके आगे टीन का बडा शेड निर्माण किया गया I इन दोनों मंदिरोमें शिवस्मारक का निर्माण किया है I




    अन्य निर्माण कार्य





    प्रतीक्षागृह का निर्माण २००१ में किया गया था I महाप्रसाद के लिए भक्तोंकी बढती संख्या देखते हुए, उन्हे महाप्रसाद के लिए लाईन में छोडने के लिए, और भोजन होने तक अन्य भक्तोंको प्रतीक्षा में खडा होना पडता था I यह सब ध्यान में रखते हुए, ट्रस्ट ने इसी इमारत के बगल में एक १००' * २०' आकार के प्रतीक्षा हॉल का निर्माण किया है I इस शेड में १००० स्वामी भक्त बैठ सकते है I यहीसे उन्हे महाप्रसाद की लाईन में भेजा जाता है I